अध्याय 4: क्या यह ऐसा संयोग हो सकता है?

छोटी-सी बच्ची चौड़ी, बिना पलक झपकाए आँखों से शार्लट को घूरती रही।

उसके नन्हे हाथ शार्लट की ड्रेस को कसकर पकड़े थे, जैसे उसे डर हो कि शार्लट कहीं उसे छोड़कर न चली जाए।

लगता था, उसे शार्लट बहुत पसंद है।

जब शार्लट ने उस बच्ची की तीखी नज़र से नज़र मिलाई, तो उसके सीने में अजीब-सी कसक भर गई। वह बच्चे को देखती रही, समझ नहीं पा रही थी कि उसे ऐसा क्यों लग रहा है। अचानक उमड़ आई भावना को दबाते हुए शार्लट झुकी और बच्ची को उठाकर अपनी बाँहों में भर लिया।

एक पल हिचकने के बाद उसने बच्ची को गाड़ी में बिठा दिया।

उसने कहा, “आवा, हम अस्पताल चल रहे हैं।”

उसने सोचा, ‘बच्चे नाज़ुक होते हैं; बेहतर है एक बार दिखा दिया जाए।’

बच्ची ने कुछ नहीं कहा, बस उसके हाथ शार्लट की गर्दन से कसकर लिपटे रहे, और उसका छोटा-सा चेहरा शार्लट के गाल से चिपका रहा।

शार्लट की आँखों में हल्की-सी मुस्कान चमकी। उसने बच्ची की पीठ थपथपाई, उसे धीरे-धीरे शांत करती हुई।

शार्लट बोली, “बेटा, सब ठीक है। डरो मत। मैं तुम्हें अस्पताल ले जा रही हूँ, ठीक है?”

लड़की अब भी नहीं बोली, पर उसका शरीर धीरे-धीरे ढीला पड़ने लगा।

बच्ची को शांत होते देख शार्लट ने अपनी पकड़ हल्की की, उसे अपनी गोद में बैठाया, और नरम मुस्कान के साथ धीमे से बोली, “बेटा, तुम्हारा नाम क्या है? क्या हम तुम्हारी मम्मी-पापा से संपर्क कर सकते हैं?”

बच्ची ने मुँह खोला, पर शब्द नहीं निकल पाए। झुंझलाहट के आँसू उसकी आँखों में भर आए।

यह देखकर शार्लट ने तुरंत उसे दिलासा दिया, धैर्य से समझाती रही। “कोई बात नहीं, धीरे-धीरे। समय लो। हम आराम से बात करेंगे, ठीक है?”

लड़की ने शार्लट की तरफ देखा और काफी देर बाद आज्ञाकारी-सी होकर सिर हिला दिया।

उसने फिर बोलने की कोशिश की, उसकी आवाज़ फुसफुसाहट से भी धीमी थी। “ए… एम्मा…” इतना हल्का—मानो बहुत समय से बोली ही न हो—कि शार्लट को उसके शब्द ठीक से सुनाई ही नहीं दिए।

अपने मेडिकल अनुभव के आधार पर शार्लट ने एम्मा की हालत का एक शुरुआती अंदाज़ा लगाया।

शार्लट को ऑटिज़्म का शक हुआ, हालांकि उसे नहीं पता था कि यह जन्म से है या बाद में विकसित हुआ है।

नोआ और एंडी पास ही खड़े थे, उत्सुकता से एम्मा को देख रहे थे, और उसके प्रति एक अनजानी-सी अपनापन महसूस कर रहे थे।

नोआ ने एम्मा की तरफ देखकर उसे हौसला दिया। “हाय, मैं नोआ हूँ। तुम्हारा नाम क्या है?” कहते ही एम्मा की नज़र आखिरकार शार्लट से हटकर नोआ पर आ गई।

शायद नोआ भी उसे पसंद आ गया। उसने फिर बोलने की कोशिश की, इस बार आवाज़ थोड़ी ऊँची थी, जब उसने दोहराया, “एम्मा।”

इस बार शार्लट तैयार थी—वह झुककर ध्यान से सुनने लगी।

शार्लट आखिरकार समझ गई कि उसका नाम एम्मा है।

नोआ ने बड़े बनने का ढोंग करते हुए एम्मा के बालों पर हल्के से हाथ फेरा। वह बोला, “गुड गर्ल!”

एंडी पीछे नहीं रहना चाहता था। उसने एम्मा की ओर हाथ बढ़ाया—उसकी हथेली पर एक टॉफी रखी थी।

उसने मीठी-सी मुस्कान दी। “लो, बहुत मीठी है।”

एम्मा ने पहले नोआ को देखा, फिर एंडी को, और फिर सावधानी से हाथ बढ़ाकर टॉफी ले ली, उसे अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया।

फिर, जैसे उसे शर्म आ गई हो, उसने अपना सिर फिर से शार्लट की बाँहों में छुपा लिया, सोचते हुए—कितना मुलायम, कितना गर्म… मेरी मम्मी भी ऐसी ही होगी।

शार्लट मुस्कुराई, धीरे से एम्मा के बाल सहलाए, और फिर पूछा, “एम्मा, तुम्हारे मम्मी-पापा कहाँ हैं? क्या उन्हें पता है कि तुम यहाँ हो? क्या तुम उनसे संपर्क कर सकती हो?”

काफी देर बाद एम्मा की दब्बी-सी आवाज़ आई, “पापा… काम पे। मम्मी… चली गई।”

गाड़ी में सन्नाटा छा गया; सबने एम्मा के शब्द सुन लिए। नोआ और एंडी ने एक-दूसरे की तरफ देखा, फिर दोनों ने धीरे से एम्मा के एक-एक हाथ को थाम लिया।

एम्मा ने विरोध नहीं किया, बस धीरे से उनके हाथों को भी थाम लिया।

शार्लट और एवा—दोनों ही—एम्मा को प्यार भरी नजरों से देख रहे थे, और शार्लट ने आगे कुछ पूछकर दबाव डालना ठीक नहीं समझा।

उसकी नजर नूह और एंडी पर जा टिक गई—वो गहरी सोच में डूब गई।

नूह और एंडी आसपास थे तो एम्मा काफी निश्चिंत हो गई, बीच-बीच में उनसे बातें भी करने लगी।

वे जल्दी ही अस्पताल पहुँच गए।

पूरी जाँच के बाद डॉक्टर ने कुछ दवाइयाँ लिखीं और शार्लट से कहा कि बिल जमा कर आए।

शार्लट ने सिर हिलाया, पर्ची हाथ में ली और बच्चों को एवा के पास छोड़ दिया।

लेकिन नूह और एंडी ने ज़िद पकड़ ली कि वे शार्लट के साथ ही जाएंगे।

शार्लट मजबूर होकर उन्हें साथ ले चली। उधर एम्मा उसे गिड़गिड़ाती नजरों से देख रही थी, उसकी नन्ही उँगलियाँ शार्लट की ड्रेस को कसकर पकड़े थीं।

शार्लट हिचकिचाई, मगर आखिरकार उसे लगा कि एम्मा को साथ ले जाना सुरक्षित नहीं होगा। वो झुककर नरमी से बोली, “एम्मा, मैं बिल जमा करके अभी आ रही हूँ। अच्छे से यहीं बैठकर इंतज़ार करना, ठीक है?”

एम्मा ने थोड़ी देर तक जद्दोजहद की, फिर आखिरकार हाथ छोड़ दिया।

यह देखकर शार्लट मुस्कुराई और बोली, “गुड गर्ल।”

इधर जेम्स के लोगों ने बहुत जल्दी एम्मा का पता लगा लिया।

खबर मिलते ही जेम्स भागता हुआ अस्पताल पहुँचा। एम्मा को सही-सलामत देखकर उसने राहत की साँस ली और उसे गोद में उठा लिया।

लेकिन एम्मा छटपटाने लगी—वो उसके साथ जाना नहीं चाहती थी। जेम्स ने धीमे स्वर में उसे फुसलाया, “एम्मा, अच्छी बच्ची बनो, वरना अगली बार मुझे तुम्हें बंद करना पड़ेगा।”

यह सुनते ही एवा को जेम्स से नफरत-सी हो गई। वह आगे बढ़कर उसे रोकते हुए तीखे स्वर में बोली, “तुम हो कौन? एम्मा को मुझे वापस दो।”

एवा के सामने जेम्स आकर खड़ा हो गया। एम्मा को खो देने के खयाल भर से वह तिलमिला उठा था। उसकी आँखों में बर्फ़-सी ठंडक थी, मगर उस ठंडक के पीछे घबराहट भी दहक रही थी। वह एवा को घूरते हुए बोला, “एम्मा मेरी बेटी है। तुम करना क्या चाहती हो?”

एवा ने उसे शक की नजर से देखा और तिरस्कार से हँसी। “सिर्फ इसलिए कि तुम कह रहे हो? तुम्हें दिख नहीं रहा कि एम्मा तुम्हारे साथ जाना नहीं चाहती? मुझे तो तुम अपहरणकर्ता लगते हो!”

जेम्स गुस्से में हँस पड़ा—यह पहली बार था कि किसी ने उसे अपहरणकर्ता कहा था।

“मेरी बेटी पर हाथ डालने वाली तुम पहली हो। मुझे नहीं फर्क पड़ता कि तुम उसे कैसे लेकर आईं, लेकिन अगर उसे कुछ भी हुआ तो मैं तुम्हें ज़िंदगी भर पछताऊँगा। मेरी बेटी के सिर का एक बाल भी कम हुआ तो मैं तुम्हारा सिर गंजा कर दूँगा। उसे एक खरोंच भी आई तो मैं तुम्हारा एक हाथ-पैर तुड़वा दूँगा।” उसकी आवाज़ में जहर था, और उसकी निगाह एवा पर ऐसी जमी थी जैसे वह उसे पहले ही मरा हुआ मान चुका हो। एवा गुस्से और डर के बीच जड़ हो गई, मुँह से शब्द नहीं निकले।

उसी वक्त शार्लट बिल जमा करके वापस आई और देखा कि लोग एक ही तरफ़ मुँह करके देख रहे हैं।

पूछने पर उसे पता चला कि वहाँ हंगामा हो रहा है। अगले ही पल उसने जेम्स की आवाज़ सुनी—और उसके कदम वहीं थम गए।

जेम्स की बेटी गायब थी?

शार्लट एक पल को चौंकी, मगर फिर उसने उस बात को झटक दिया।

उसने खुद को और भी अनदेखा-सा रखते हुए, नूह और एंडी को साथ लिए दीवार से सटकर चलना शुरू किया, और सावधानी से दूसरा रास्ता पकड़ लिया।

उसे यह नहीं दिखा कि जेम्स की बाँहों में एम्मा थी।

अस्पताल के कमरे में लौटकर एवा गुस्से से भरी हुई थी, और बड़बड़ाते हुए जेम्स को कोस रही थी। “वो कमबख्त आदमी! अगर उसे अपनी बेटी की इतनी फिक्र है तो वो खोई कैसे? और ऊपर से मुझे धमकाने चला है? क्या इसे लगता है ये कोई पुराने ज़माने का राज है और ये खुद कोई बादशाह है?”

एवा का गुस्सा देखकर शार्लट को अचानक पहले वाली घटना याद आ गई, और उसके दिल की धड़कन तेज हो उठी।

कहीं ये इतनी बड़ी इत्तेफ़ाक तो नहीं?

पिछला अध्याय
अगला अध्याय